ठंडाई व विभिन्न प्रकार की ठंडाई बनाने की विधि
ठंडाई
ठंडाई को ठंडाई क्यों कहा जाता है?
ठंडाई सूखे मेवों और दूध से तैयार होती है। सूखे मेवे की प्रकृति गर्म तासीर वाली होती है परंतु जब इन्हें पानी में भिगो दिया जाता है तो इनकी गर्म तासीर ठंडी तासीर में बदल जाती है इसलिए जब भीगे हुए सूखे मेरे और दूध से मिलाकर ठंडाई बनाई जाती है तब यह ठंडाई गर्मी देने की बजाय ठंडक प्रदान करती है
ठंडाई कई प्रकार की होती है मुख्य रूप से सूखे मेवों को भिगोकर, पीस कर दूध में मिलाकर बनाई गई होती है।
ठंडाई गर्मियों का एक मीठा पेय है। ठंडाई मुख्य रूप से महाशिवरात्रि और होली पर खाई जाती है। ठंडाई बनाने के लिए कुछ सूखे मेवों को पानी में भिगोया जाता है। इनका छिलका उतारकर पीसकर दूध में चीनी मिलाकर पिया जाता है। सूखे मेवों को पानी में भिगोने से वे ठंडे हो जाते हैं, इसलिए इसका नाम ठंडाई पडा।
यहां आपको कई तरह के ठंडाई की रेसिपी शेयर कर रहे हैं।
पारंपरिक
बोतल वाली ठंडाई
सामग्री-
2 बड़े चम्मच काजू,
3 बड़े चम्मच बादाम,
डेढ़ बड़ा चम्मच पिस्ता,
2 बड़े चम्मच मगज (तरबूज के बीज),
डेढ़ बड़ा चम्मच खसखस,
डेढ़ चम्मच काली मिर्च,
3 बड़े चम्मच सौंफ,
1 छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर,
1 किलो चीनी,
डेढ़ गिलास पानी,
15 से 20 केसर के धागे (वैकल्पिक),
सोडियम बेंजोएट 1/2 छोटा चम्मच (वैकल्पिक)।
बनाने का तरीका-
सभी साबुत सूखे मेवों को पानी में भिगोने के लिए रखें अब भीगे हुए सूखे मेवे का मिक्सी में पीसकर बारीक पेस्ट तैयार कर छलनी से छान ले। अब चीनी में पानी डालें और आधा तार की चाशनी बनाएं ।गैस बंद कर दे। ठंडी चाशनी में धीरे-धीरे करके पेस्ट डाल दें।अब कम आंच पर गाढ़ा होने तक लगातार चलाते हुए पकाएं। आंच बंद कर दें। ठंडा होने के लिए रखें। तैयार ठंडाई को कांच की बोतल में बंद कर फ्रिज में रख दें।
नोट-
यदि इस ठंडाई में अंत में सोडियम बेंजोएट डालकर तैयार किया जाए
तो यह ठंडाई 1 से 2 महीने तक खराब नहीं होती है। दो से तीन चम्मच ठंडाई को एक गिलास दूध में डालें और रोजाना सुबह इसका सेवन करें।
बोतल वाली ठंडाई की पूरी रेसिपी इस वीडियो के माध्यम से देख सकते हैं
👉
________________________________________________
औरेंज ठंडाई
यह गर्मियों में शरीर को तरोताजा रखती है। यदि आप ठंडाई में कुछ नया आविष्कार चाहते हैं तो आज मैं आपको ऑरेंज ठंडाई के बारे में बताना चाहती हूं यह स्वाद में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ बहुत पौष्टिक भी होती है।
क्योंकि संतरा एसिडिक होता है इसलिए इसका रोजाना सेवन नहीं करना चाहिए नहीं तो यह एसिड के स्तर को बढ़ा देता है
जिसको गैस अपच ,एसिडिटी अल्सर इत्यादि की बीमारी है उन्हें खाना खाने के तुरंत पहले अथवा बाद में संतरे का जूस पीने से बचना चाहिए।
![]() |
| औरेंज ठंडाई |
औरेंज ठंडाई
बनाने का समय: 10 मिनट
सर्व: 1
सामग्री-
2 संतरे।
1 चम्मच मगज।
1 चम्मच पिस्ता कतरन।
1 चम्मच बादाम कतरन।
2 काजू (वैकल्पिक)।
1 चम्मच सौंफ पाउडर।
2 चम्मच सफेद देसीखांड।
एक चुटकी काला नमक।
एक चुटकी कालीमिर्च पाउडर।
¼ कप गुनगुना पानी भिगोने के लिए।
बनाने की विधि-
संतरे को छोड़कर शेष सभी सामग्री को गुनगुने पानी में 2 घंटे भिगोने के लिए रख दें। अब भीगी हुई सभी सामग्री का मिक्सी से बारीक पेस्ट तैयार करें। संतरे का जूस निकाल लीजिए फिर इस पेस्ट को संतरे के जूस में मिला दे। ठंडा ठंडा सर्व करें।
नोट-
खाना खाने के 1 घंटा पहले अथवा एक घंटा बाद इस ठंडाई का दोपहर में सेवन करें।
यदि आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है तो आप संतरे का सेवन बिना सूखे मेवे के कर सकते हैं।
________________________________________________
पुदीना ठंडाई
यदि यूरिक एसिड का स्तर शरीर में बढ़ रहा है तो यह संतरे की ठंडाई यूरिक एसिड के स्तर को कम करती है।
पुदीना फ्लेवर ठंडाई
सामग्री-
½ कप पुदीना पत्र
2 संतरे
¼ चम्मच काला नमक
¼ चम्मच कालीमिर्च पाउडर
¼ कप पानी
बनाने का तरीका-
मिक्सी के जार में पुदीना, काली मिर्च, काला नमक और पानी मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें इस पेस्ट को संतरे के जूस में मिलाकर ठंडा ठंडा सर्व करें।
________________________________________________
लेखिका ने इस लेख में कई तरह की ठंडाई बनाना बताया है लेखिका शालिनी जैन एक युटयुबर और ब्लागर हैं फेसबुक कांटेक्ट भी क्रिएट करती हैं।
लेख पब्लिश करने की तिथि-
17 फरवरी 2023, दिन शुक्रवार
________________________________________________



Comments
Post a Comment